10 September 2018

सुप्रीम कोर्ट और व्हाट्सप्प में विवाद !

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डिजिटल इंडिया अभियान के दौर में भारत के सबसे प्रचलित सोशल मीडिया व्हाट्सएप्प के चलन पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों तानी भवें.

यह मामला झारखण्ड के हजारीबाग कोर्ट का है जहाँ एक आपराधिक मामले में हजारीबाग कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत प्राप्त दंगो के अरोपित को ट्रायल में व्हाट्सएप्प कॉल द्वारा उपस्थिति दर्ज कराने  की इज़ाज़त दी | यह मामला 2016 के दंगो के आरोपी झारखण्ड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साओ और उनकी पत्नि निर्मला देवी को व्हाट्सएप्प कॉल द्वारा ट्रायल के दौरान उनके पर लगे आरोपों को बताया गया| निचली अदालत के इस कृत्य पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती के साथ यह कहते हुए आलोचना की  "क्या यह कोई मजाक चल रहा है "|सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह में झारखंड से इस मामले में जबाब तलब किया है |

अब सवाल ये उठता है कि क्या निचली अदालत का ये कदम डिजिटल इंडिया और न्याय पूर्ण है या ये केवल समाज के तथाकथित संभ्रांत लोगों को दिन जाने वाली सहूलियत मात्र है !!आपकी राय क्या है ... 
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